Pathankot Hamle Ki Pakistani Jaanch ( पठानकोट हमले की पाकिस्तानी जांच )

बीते दिनों भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी नवाज़ शरीफ की पोती की शादी में जा पहुंचे थे।  प्रधानमंत्री की इस यात्रा से प्रस्न्नचित  होकर कुछ पाकिस्तानियों ने भारत (पठानकोट) में आकर 'बारात में बिन बुलाए फुफों की तरह' जबरदस्त ख़ुशी मनाई।  दरअसल उनका ख़ुशी मानाने का तरीका थोड़ा विचित्र था जिसने हमारे हरे भरे पठानकोट के चित्र ख़राब कर सामान्य जन जीवन सहमा कर रख दिया था। अंतत हमने अपने कई जांबाज सिपाही व सैनिक खो दिए जो की राष्ट्र  के लिए दुखद है।  इसी घटना को  लेकर सम्पूर्ण देश में हमारी सुरक्षा प्रणाली से लेकर कमजोर राजनीती तक कई सवाल उठे।  कुछ लोगों ने तो सोफे पर बैठे बैठे व्हाट्सप्प व फेसबुक पर अत्यन्त शोक भी प्रकट किया था। कई देशभक्त फेसबुक पर केंद्र सरकार की ऐसे आलोचना कर रहे थे जैसे सरकार ने हमलावरों को पठानकोट में छुट्टियां मानाने के लिए स्पेशल आफर वाला आमंत्रण पत्र भेजा  हो?


इन्ही आलोचनाओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने पठानकोट हमले की जांच खुद पाकिस्तान से करवाने की ठान ली ( क्यूंकी हमारी जांच एजेंसियां तो सिर्फ बॉलीवुड की फिल्मों में व धारावाहिको में अच्छा काम करने के लिए जानी जाती है, असलियत में ये सब करना उनका काम नहीं है ) 

पठानकोट हमले की पाकिस्तानी जांच के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य व गुप्त बातें जो की जनता से छुपाई गयी - 

जैसे ही भारत ने पाकिस्तानं से पठानकोट हमले की जांच करवाने की इच्छा प्रकट की, पकिस्तान विदेश सचिवालय में तुरंत फटाके फोड़कर भारत की इस पहल का स्वागत किया।  ( ये वही ११ साल पुराने फटाके थे जो उन्होंने क्रिकेट विश्वकप में पाकिस्तान की भारत पर जीत पर फोड़ने के लिए लाकर रखे थे ). खबर मानो आग की तरह पुरे पाकिस्तान में फ़ैल गयी, वहां कुछ समाजसेवी संगठन (जिन्हे हम आतंकवादी संगठन के नाम से जानते हैं ) के मुखियाओं ने अचानक मिली ख़ुशी  के कारण हिंदी फिल्मों  के मुर्ख विलेन की तरह अंधाधुंध फायरिंग कर अपने ही गिरोह के दसियों लोगों को मार डाला। देखते ही देखते, कुछ ही मिनट्स में   तहरीक ऐ  तालिबान और लश्कर ऐ  तय्यबा के मुख्य समाजसेवियों ने पाकिस्तान सरकार से उनकी संपूर्ण मदद का आश्वसन भी ले डाला।
पाकिस्तान सरकार की तरफ से हमले की जांच करने के लिए आने वाले  स्पेशल अफसर और पाकिस्तानी समाजसेवी संगठन (भारत में आतंकवादी संगठन ) के बीच हुई बातचीत के कुछ मुख्य अंश प्रस्तुत है 

मुखिया 1 : सलाम वालैकुम मिया ! और सुनाइए,, सब खैरियत? सुना है आप हमारी नाकामयाबी की जांच करने हिंदुस्तान जा रहे हैं?

पाकिस्तानी अफसर : वालैकुम सलाम जुनैद मियां  !  अजी जांच पड़ताल करना तो वहां की जनता का काम है।  हम तो बस कश्मीरी पुलाव के साथ पंजाबी दाल मखनी खाने जा रहें हैं।  

मुखिया 1 : जनाब आप अपना मकसद भूल रहें हैं, आपको वहां जाकर पता करना है कि हमसे कहाँ चूक हुई है ? आपको नए रास्तो के बारे में जानकारी लानी है। 

पाकिस्तानी अफसर : मियां आप जरुरत से ज्यादा हुकुम फरमा  रहे हैं, याद रहे आपको भी अपने काम सही ढंग से करना है।  72 हूरो  की बात आपके सारे लड़को के जहन में बैठ जानी चाहिए। 

मुखिया 1 : आपका 72 हूरो वाला फार्मूला ज्यादा दिनों तक नहीं चला सकते मियां। 72  हूरों के लालच में हमारे लड़के एक दूसरे पर ही नेट प्रैक्टिस करते रहते हैं.... 

पाकिस्तानी अफसर : क्यों नहीं चला सकते ?  याद रहे अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम आप पर नेट प्रैक्टिस कर लेंगे। 

मुखिया 1 : जनाब ! जनाब ! हेलो जनाब आपकी आवाज नहीं आ रही है !! हेलो ! हेलो ( इतना कहकर मुखिया फ़ोन काट देता है )


कुछ देर बाद अफसर के पास फिर से फ़ोन आता है 


मुखिया 2 : हेलो ! वालेकुम सलाम जनाब, अभी अभी मेरी बात जुनैद मियां से हुई।  आप कुछ नेट प्रैक्टिस के बारे में बात कर रहे थे? 

पाकिस्तानी अफसर : जी जनाब।  

मुखिया 2 : जी मुझे नेट प्रैक्टिस से कोई परेशानी नहीं है।  तो बोलिए आप हिंदुस्तान से लौटकर कब आ रहे हैं ?

पाकिस्तानी अफसर : हेलो ! हेलो ! हेलो (अफसर डरकर फोन काट देता है )




थोड़ी देर बाद अफसर अपनी जांच टीम के साथ भारत के लिए रवाना हो जाता है।  भारत पहुंचकर अफसर अपनी टीम के साथ किस प्रकार जांच करता है? और उसे क्या क्या सबूत मिलते हैं? ये जानने  के लिए बने रहिए -

पठानकोट हमले की पाकिस्तानी जांच पार्ट - 2  (soon  available)

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