सर ! बड़ी जल्दी चले गए आप
मैं आपसे कभी मिल नहीं पाया सर , इसका हमेशा मुझे मलाल रहेगा। जब से थोड़ी फिल्मों की समझ हुई तो आपका नाम हमेशा सबसे आगे पाया। न जाने क्यों , लेकिन आपसे एक जुड़ाव हमेशा महसूस किया। इसका एक कारण ये भी था कि आप कभी राजस्थान यूनिवर्सिटी में पढ़े थे और मैं भी वहीं का विद्यार्थी रहा। इसलिए आपका नाम आते ही मेरे अंदर क्षेत्रवाद हावी हो जाता है। कुछ रोज पहले सिनेमा पर एक दोस्त से बात कर रहा था तो दोस्त ने कहा कि " मैंने हालिया रिलीज़ फिल्म ' इंग्लिश मीडियम ' देखी। इरफ़ान खान ने उसमें जबरदस्त एक्टिंग की है। यार ये बंदा तो कमाल है इसे जो भी करैक्टर दो , उसमें ढल जाता है। बाकी एक्टर्स में वो बात नहीं है। ये बन्दा पहले करैक्टर में उतरता है , उसे जीता है फिर फिल्म में उस रोल को करता है। एक एक करैक्टर के लिए कई महीनों तक तैयारी करता है। बाकी लोग इसका मुक़ाबला क्या करेंगे ? वो साल में फ़िल्में ही चार चार करते हैं कि तैयारी के लिए उनको टाइम कहाँ है ? " दोस्त ने बात पूरी भी नहीं की तभी मैंने बोला - " अरे भाई तो वो बंदा राजस्थान यूनिवर्सिटी से पास आउट है। वहां से निकला हुआ ...
