हर हर गंगे

इन बातों  का आधार क्या है ? जो हम आजकल  सुन रहे हैं | उनमे कई सवाल उठते हैं और कई  जवाब हमें मिलते हैं | सवाल उठाने वाले बेबस हैं और जवाब देने वाले भी बेबस हैं | कारण साफ है जिम्मेदार व्यक्ति और हुक़्मरान खामोश है | इतना सब कुछ होने पर भी मौन है या फिर जानबूझकर चुप्पी साधी हुई है क्योंकि बात के धनी तो ये मसनदों के साहिब भी नहीं है | 
  
सन 2014 का वक़्त और लोकसभा चुनावों की गरमा गर्मी तब  हमारे देश में उदयमान होता है एक ऐसा आदमी जो तत्कालीन UPA  सरकार की अधिकतर नीतियों पर सवाल उठाता है ,उसकी योजनाओं में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा की बात करता है | 125 करोड़ जनसँख्या वाले देश को शेर की उपमा देकर दहाड़ने और वार करने की नसीहत देता है |
"बहनों और भाईओं "इस वक्तव्य से जब यह सफ़ेद दाढ़ी वाला व्यक्ति शुरुआत करता है अपने भाषण की, तो सारी भीड़ से एक भावनात्मक नाता बनाता है फिर शुरू होता है सिलसिला UPA  की पोल  खोलने का |
यह व्यक्ति देश के माननीय प्रधानमंत्री है | आज अचानक यह सब लिखने का ख्याल यूँ ही नहीं आया | घर में अकेला बैठा बोर हो रहा था तो सोचा क्यों ना अंबानी की दौलत पर थोड़ा मनोरंजन कर लिया जाये और फिर क्या ,हमने उठाया फ़ोन और यू ट्यूब चालू किया | जब हमारे पास संसाधन अधिक होते हैं तो विषयों और कार्यक्षेत्रों की कमी महसूस होती है और वाहियात से विचार ही दिमाग में आते हैं | तभी न जाने क्यों हमने यू ट्यूब खोला और वीडियो देखने लगे , अचानक नजर पड़ी सरकार यु टर्न पर और फिर एक बार पुनः 2014 का चुनाव और जुमले जहन में तजा हो गये | 
 इस दौरान देखा गया कि बीजेपी सर्कार में जो नीतियाँ और योजनायें आज देश के विकास में महत्वपूर्ण है ,कभी वही  योजनायें विकास में सबसे बड़ी बाधक भी और उन योजनाओ में लाखो करोड़ो रूपये व्यर्थ हो गए थे | 
   1.  मेरे फ़ोन में बैंक से सन्देश आया की अपने खाते को आधार से लिंक करवायें जिससे की मेरा संपूर्ण डाटा बैंक क पास सुरक्षित रहे तो मुझे मेरी पहचान की गोपनीयता पर ही शक होने लगा है | मेरी पहचान ,मेरा बायोडाटा किसी अन्य संस्था को सौंपने पर मुझे मजबूर किआ जा रहा है ,अन्यथा मेरा खाता बैंक द्वारा बंद कर दिए जायेगा या यों कहें कि मेरे अधिकारों का हनन होगा | मेरी ही तरह देश के करोड़ो लोगो की पहचान ,गोपनीय दस्तावेज़ ,उनके बैंक खातों की जानकारी कोई हैकर चुटकियो में ले सकता है | इसी तरह कई और चीजें आधार से जोड़ी जा रही हैं जैसे - मोबाइल नम्बर आधार से जुड़वाएं , गैस कनेक्शन आधार से जुड़वाएं,कोई प्रमाण पत्र बनवाना है तो आधार जरूरी है आदि |
सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि इस आधार का आधार क्या है | चुनावों से पहले कांग्रेस उम्मीदवार नंदन नीलेकणि के खिलाफ चुनावी रैली में तत्कालीन गुजरात मुख्यमंत्री ने ये कहा था की -'आधार योजना में देश के लाखों-करोड़ों रूपये डूब गए,देश की जनता को जवाब चाहिए |'इन्हीं चुनावों के दौरान बीजेपी के एक नेता ने कहा था कि " आधार देश क लिए सही नहीं है,इसे नष्ट कर देना चाहिए |"कल तक जो आधार कार्ड देश के लिए सही नहीं था वही आधार आज सभी मुख्य सरकारी कागजों का आधार बन गया है और देश की विकासशिला  का आधार घोषित किया जा रहा है | यह दोगलापन क्यों ?क्या कोई जवाब दे  सकता है ?
2 . कल तक सुनते थे किसान देश का अन्नदाता है , जीवनदाता है,उसे उसकी फसल का सही मूल्य मिलना चाहिए | जिससे वो सुखमय जीवन जी सके | एक वक्त जिस नेता ने चुनावी रैली के दौरान किसानों की फसल की लागत पर 50% मुनाफे के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने की बात कही थी | उन्हीं की सरकार में आज तमिलनाडू का किसान दिल्ली में धरना करता है और कोई कार्रवाई नहीं होती है | एक किसान अपना पेशाब पीने जैसा अमानवीय कृत्य करने को मजबूर है , उनके सामने नरमुण्ड रखे थे , मगर सरकार चुप है | कश्मीर में मनचले लफंगो पर गोली चलाने का अधिकार अर्धसैनिक बलों को नहीं मिलता लेकिन मध्यप्रदेश में आंदोलन क्र रहे किसानों की गोलियों से हत्या कर पुलिस कानून व्यवस्था नियंत्रित करती है |

3 .किसी वक्त रैलियों में दावा किया जा रहा था कि  'संसद देश  का पवित्र सदन है और इसे दागियों से मुक्त किया जाएगा तथा दागी सांसद पर सख़्त कार्रवाई की जाएगी एवं अपराधी को सजा दी जायेगी | जिससे की आगे कभी कोई अपराधी संसद में प्रवेश के बारे में सोचने की हिम्मत भी ना करे | ' ऐसा दावा करने वाली पार्टी की सरकार में भी विधायक से लेकर मंत्रियों तक पर चोरो, डकैती,हत्या.रिश्वत,लूट,बलात्कार जैसे संगीन आरोप हैं और कहीं कोइ कार्रवाई नहीं की जा रही है | ऐसी क्या मजबूरी आन पड़ी PM साहब |

4. एक प्राइवेट चैनल के शो में तत्कालीन गुजरात मुख्यमंत्री ने कहा था-" पकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देना पड़ेगा | पकिस्तान को लव लेटर भेजना बंद करो |" इस तरह के दृढ विचारों वाला व्यक्ति सत्ता में आते ही शांति का उपासक हो गया | पहली वाली सरकार ने तो वहाँ लव लेटर ही भेजे थे , ये जनाब तो वहां ब्लाइंड डेट पर ही चले गए और साथ में पठानकोट हमले के रूप में रिटर्न गिफ्ट भी लेते आये | पकिस्तान द्वारा किये गए हमले की पाकिस्तानी जांच भी करवाई ( पठानकोट हमले के बाद पकिस्तान की एक टीम वहां सबूत इकठे करने आई थी ) |
5. CAG जैसी संस्थाओं का सरकार सम्मान नहीं करती यह गलत है, कुछ ऐसे ही वक्त्व्य रहे थे वर्तमान प्रधानमन्त्री जी ( तत्कालीन गुजरात मुख्यमंत्री ) के लेकिन ये सब वो उस वक्त भूल गए होंगे जब बीजेपी सरकार ने ही CAG को मर्यादा में रहने को कहा था
6. FDI किसी वक्त ईस्ट इंडिया कंपनी की तर्ज पर देश की गुलामी का कारन बन सकता था , परन्तु मई 2014 के बाद FDI देश की तरक्की के लिए अत्यावश्यक हो गया और अब तो कई क्षेत्रों में तो 100 % विदेशी निवेश को भी मंजूरी मिल गयी है। ऐसी क्या दुविधा आ पड़ी जो आप संसद में बहुमत के धनी होकर भी ' बात के धनी ' ना रह सके ?

                                                                                  ................जारी 


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