Ghar Mein Kaidi (घर में कैदी)

"भारत माता की जय" एक ऐसा शब्द जिसे शायद हर भारतीय बड़े गर्व के साथ बोलना चाहेगा ।
लेकिन पिछले कुछ दिनों में इस शब्द को देशभक्ति का मानक तय कर दिया गया है। कुछ लोग कहते हैं भारत माता की जय बोलने वाला ही देशभक्त है,जो भारत माता की जय नहीं बोलता है उसे इस देश में रहने का कोई अधिकार नहीं है,वही कुछ लोगो का मानना है की यह जरुरी नहीं की भारत माता की जय बोलने वाला ही देश भक्त है । दूसरी बात ज्यादा उचित है क्योंकि ये एक देशवासी की स्वंयं की सोच है की वो देशभक्ति के किस मापदंड की पालना करता है । हम किसी को भारत माता  की जय बोलने के लिए बाध्य नहीं कर सकते । लेकिन, कोई भारत माता  की जय बोले तो इस बात का विरोध कतई उचित नहीं है ।



Are we a prisoner in our own house?



दूसरा घटना से जुड़ा एक मामला हाल ही में जम्मू - कश्मीर में एक शिक्षण संसथान में देखने को मिला है । पिछले दिनों NIT श्रीनगर में भारत वेस्टइंडीज के क्रिकेट मैच में भारत की हार के बाद भारत मुर्दाबाद के और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे । जिन छात्रों ने इसका विरोध किया उनके साथ मारपीट की गयी और उन्हें हॉस्टलस के रूम्स में जाकर मारा पिटा । जब उन छात्रों ने इसकी जानकारी कॉलेज प्रशासन और पुलिस को दी तो उन्होंने भी कोई ठोस कदम न उठाकर उदासीनता दिखाई और जम्मू कश्मीर के स्थानीय छात्रों का ही साथ दिया । 


जम्मू कश्मीर जो कि भारत का एक विशेष राज्य है वह भारत मुर्दाबाद और पकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगना आम बात है। जम्मू कश्मीर , जहां भारत का संविधान मानने की कोई अनिवार्यता नहीं है । भारत के किसी भी राज्य में J & K का निवासी स्वंत्रता पूर्वक रह सकता है लेकिन, J & K में अन्य राज्य का निवासी नहीं रह सकता । इसके अलावा भी J & K को विशेषाधिकार है । फिर भी वहाँ की स्थानीय जनता अक्सर भारत विरोधी गतिविधियाँ करती रहती है । तो उन्हें कोई क्यों कुछ नहीं कहता ? क्या इसलिए कि वो स्पेशल राज्य है या इसलिए कि वहाँ की जनता खुद को भारतीय से ज्यादा पाकिस्तानी मानती है ।



Hypocrisy : Just an election campaign's statement or real commitment?  




NIT में विद्यार्थियो से हुई मारपीट के बाद वहां के प्रशासन की उदासीनता उनकी देशविरोधी भावना को उजागर करती है । इस दौरान देश का घिनौना राजनितिक पक्ष भी देखने को मिलता है , 56 इंच के सीने वाले नेता और JNU में हुई घटना पर ब्यान बाजी करने वाले नेता चुप क्यों है ? क्या इसलिए की आगामी चुनावो में उन्हें सरकार बनानी है या इसलिए की किसी एक बयान से कोई एक वर्ग उन्हें वोट नहीं देगा । 

इस ओछी राजनीती का खामियाजा NIT के गैर कश्मीरी छात्रों को उठाना पड रहा है , लगता है की इस लोकतंत्र में उनकी सुनने वाला कोई नहीं है । लगता है की वो छात्र अपने ही घर मैं कैदी हो गए हैं । 
फिर भी इन छात्रों को कश्मीर बाकी पुरे भारत देश की तरह प्यारा लगता है । 


इन छात्रों  को हमे ही सपोर्ट करना होगा और जो कश्मीर में वर्तमान स्थिती  है उसे बदलना होगा। 
युवा छात्रों  की देशभक्ति देखकर मुझे दो पंक्तियाँ याद आ रही है


  " सारा देश हमारा है , तभी तो हमें इसका चप्पा चप्पा प्यारा है । "  

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