परीक्षा की परीक्षा
' परीक्षा की परीक्षा ' विषय पर्याप्त रोचक एवं हानिकारक है। परीक्षा जो कि एक पद्धति है किसी भी व्यक्ति की योग्यता मापन की। यह परीक्षा लिखित , मौखिक , शारीरिक या मानसिक हो सकती है।परीक्षा द्वारा व्यक्ति खुद का आंकलन करता है , जमीनी हकीकत जान सकता है। हमारे देश में एक परीक्षा परिणाम व्यक्ति का समाज और परिवार में रुतबा और स्थान निर्धारक होता है। परन्तु ,वर्तमान समय में हमारे देश में कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं जो परीक्षा को परीक्षा देने के लिए बाध्य करती हैं कि जो परीक्षा ली गयी है व परीक्षा वाकई में परीक्षा कहलाने लायक है भी या नहीं ? यदि ऐसा संदेह प्रकट होता है तो फिर परीक्षा का भी कर्तव्य बनता है कि वह स्वयं एक परीक्षा पास करे - देश और जनता के विश्वास की परीक्षा। जिससे देश के प्रतिभागियों का भरोसा परीक्षा पर बना रहे।
यूँ तो हमारे देश में कई बार परीक्षा पद्धति पर सवाल उठाये जाते रहे हैं , मगर ये सारे सवाल परीक्षा पद्धति पर थे ना की परीक्षा की विश्वनीयता पर। आज तकनीकी दौर में परीक्षा ऑनलाइन करने का चलन बढ़ रहा है जो की वक्त एवं कार्यभार को देखते हुए आवश्यक भी है। विगत कुछ समय से इस परीक्षा पर ही सवाल उठने लगे हैं।
AIPMT 2015 , NEET 2016 , SSC 2018 , शिक्षक भर्ती ( RPSC ) 2013 , व्यापमं घोटाला , REET 2018 , RAS , UPPCS आदि कुछ ऐसी परीक्षायें हैं जिनकी असफलता इन संस्थाओं पर सवाल उठाती है। CBSE और SSC जैसी संस्थाएं जहाँ गोपनीयता और निष्पक्षता पर खरी नहीं उतर पायी हैं , वहीं RPSC जैसी संस्थाएं तो अब मजाक सी लगने लगी हैं , ' व्यापमं घोटाला' पूरे देश को याद है। आज तो आलम यह है कि अगर कोई विद्यार्थी आज अगर परीक्षा देकर घर पहुंचता है तो वह उत्तरों का मिलान नहीं करता , खबर देखता है कि कहीं पेपर आउट तो नहीं हुआ।
मेडिकल की परीक्षा में घपला , स्टाफ सलेक्शन में घपला , तहसीलदार ,शिक्षक ,क्लर्क आदि सभी परीक्षाओं में गड़बड़ियां। क्या विद्यार्थी के समय और मेहनत का कोई महत्त्व नहीं ? तमाम सरकारी सुविधाएं और खर्च मिलने के बावजूद ये संस्थाएं परीक्षा साफ़गोई और निष्पक्षता से नहीं करा सकती। उस पर भी ' चोरी ऊपर से सीनाज़ोरी।' परीक्षा कक्ष के भीतर तक की तस्वीरें सुर्खियाँ बन जाने के बावजूद ये परीक्षा में गड़बड़ी को नहीं स्वीकारते। सरकारें भ्रष्ट भर्तियों पर लीपापोती में जुटी हैं। क्या सरकारी बयान ही सौलह आने सच है ?
हालात तो ये हो गये हैं - "लश्कर तुम्हारा है , सरदार तुम्हारा है
तुम झूठ को सच लिख दो , अख़बार तुम्हारा है "
देश की सबसे बड़ी शक्ति युवा शक्ति आज अपने हक के लिए सड़क पर है , साहिबे मसनद साम्राज्य विस्तार में मग्न हैं। मेहनत करके अपना भविष्य सँवारने के इच्छुक युवा अपनी रातों की नींद और दिन का चैन प्रदर्शनों में लुटाने को मजबूर हैं लेकिन सरकारों के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगती। 'परीक्षा का तनाव दूर करने वाले सेमीनार 'की जगह यदि परीक्षाओं की गड़बड़ियों पर ध्यान दिया होता तो शायद आज तस्वीर दूसरी होती। मगर हमें तो फुरसत ही नहीं राज्यों के चुनाव , सरकार बनाने की सांठगांठ - इससे बाहर निकलें तो सोचें। उस पर नेताओं के बयान - " पकौड़े बेचो। " विडंबना इस देश की और दुर्भाग्य इस देश के युवाओं का जो उन्हें ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन करने वाले युवाओ को ऐसे नये नये Business Idea सुनने को मिल रहे हैं।
' बेटी बचाओ ,बेटी पढाओ ' की बात करते हैं लेकिन पढ़ी लिखी बेटियों की समस्या पर भी तो गौर फ़रमाओ। केवल नवजात कन्या की जीवन रक्षा ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि युवा उज्जवल भविष्य भी देश का ही उज्जवल भविष्य है। भ्रष्टाचार विरोधी छात्रों पर लाठीचार्ज क्र दिया जाता है लेकिन मूर्तिभंजकों का अता पता नहीं है। किसान कर्जमाफी की आस में मर जाते हैं लेकिन हजारों करोड़ डकारकर व्यापारी विदेश भाग जाते हैं। वादे तो कभी चौकीदारी के थे लेकिन - "कसमें वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या ?
तो जनाब 'परीक्षा के हितार्थ ' प्रदर्शनरत इन विद्यार्थियों की मांगों पर संज्ञान लें और सवालिया परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच कराएंजिससे की देश के युवा का कीमती वक्त बचाया जा सके। ये सड़कों पर लाठी खाने हेतु नहीं बने हैं ,ये तो Accelerator हैं जो विकास की गति को चुटकियों में बढ़ा सकते हैं। अगर ये मेहनतकश और उत्साही हैं तो देश का भविष्य स्वर्णिम है। अंत में यही कहना चाहूँगा
" अरे देश के नौजवानों चलो देश को बचाएं ,
देश घिरा है भ्रष्टाचार से आओ भ्रष्टाचार मिटायें।"


shi hai
ReplyDeleteexams me ho rhi gadbadi band honi chahiye.
yes this is true in today's context. India's youth is wasting its time on watching youtube viners and it is really unfortunate
ReplyDeleteBilkul thik. Sarkaar dhyaan nahi de rhi
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