कवरिंग फायर ( COVERING FIRE )

आज अचानक COVERING FIRE याद आ गया। 'बॉर्डर ( BORDER ) ' फ़िल्म  का दृश्य है जब सैनिक युद्ध में घायल  है तो दूसरा सैनिक उसे बचाने  की ख़ातिर जाता है और उसके साथी दुश्मन पर अंधाधुंध गोलीबारी करते हैं। इन गोलियों की  आड़ में वह सैनिक अपने घायल साथी को बचा लाता है , यही अंधाधुंध गोलीबारी COVERING FIRE है।
ना युद्ध चल रहा है , ना ही कोई फिल्म , फिर भी आज रह रहकर COVERING FIRE ही याद आ रहा है। कारण क्या है ? जो कारण सामने दिखाई दे रहे हैं वो वाकई सही हैं भी या नहीं कुछ ऐसे ही प्रश्न हमारे मन में उठ रहे हैं। सामने जो कारण दिख रहे हैं वो प्रथम दृष्टया COVERING FIRE ही प्रतीत हो रहा है, जो अग्रलिखित हैं -
लोकसभा में 12 मार्च ,( सोमवार ) को चर्चा हो रही थी उत्तरप्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर में भारतीय जनता पार्टी की हार पर। बहस धीरे धीरे हंगामे का रूप ले रही थी , दोनों ही पार्टियाँ आरोप प्रत्यारोप के बाण जोरों शोरों से एक दूसरे पर चला रहे थे। हालात गर्माते जा कि एक व्यक्ति ने मौके का फायदा उठाते हुए न केवल अपना बल्कि इन सभी नेताओं का ' उल्लू सीधा कर दिया। ' इस फुर्तीले नेता से तो बड़े से बड़े योद्धा भी शर्मा जायें और इन सब नेताओं के इस व्यूह के आगे ' द्रोणाचार्य ' का ' चक्रव्यूह ' भी असफल हो जाए। बात कुछ ऐसी ही है। लोकसभा का सत्र चल रहा था और बहस का मुद्दा - U.P में भारतीय जनता पार्टी की कुछ जगहों पर हार। मानो किसी पार्टी की हार आज इस देश में इतना बड़ा मुद्दा बन गयी है कि उस पर सदन में चर्चा हो।

हमने आरम्भ में बात की थी COVERING  FIRE  की और वो COVERING FIRE है इन पार्टियों का हंगामा। यह FIRE किया गया देश की जनता पर जो इन नेताओं की करतूतों को देख रही थी और इस FIRE  का लाभ उठाया हारे हुए प्रत्याशी और वर्तमान सरकार में मंत्री जी ने। इन मंत्री जी ने वक्त की नजाकत को देखते हुए पलक झपकने की देरी भी न की और लोकसभा में ' वित्त विधेयक ' प्रस्तुत कर दिया जो बिना चर्चा के पास भी हो गया। सर्वदलीय नेताओं हेतु लाभदायक इस बिल को ऐसे पारित करवाने पर किसी दल के किसीभी नेता ने कोई सवाल नहीं उठाया।

स्पष्ट करते हुए इस  बिंदुओं पर गौर करें तो शायद हम इस FILMY COVERING FIRE का वास्तविक घाव महसूस क्र सकें। इस बिल ने निम्न मुख्य बिंदु हैं -
1. सभी राजनितिक पार्टियों को पिछले 42 साल के दौरान मिले विदेशी चंदे की कोई जांच नहीं होगी , सीधा सा मतलब है पिछले 42 साल में राजनीतिक चंदे के रूप में कितना ' धन रंग बदल गया ' इस पर पर्दा पड़ जायेगा  और कोई अदालती कार्यवाही भी नहीं कर सकेंगे

2. जितने भी M.Ps . हैं उनका वेतन 55000 रूपये बढ़ा दिया गया है तथा राष्ट्रपति एवं स्टेट गवर्नर्स का वेतन भी बढ़ा दिया गयाहै।
आत्महत्या तो किसान कर रहे हैं पर वेतन वृद्धि की आवश्यकता शायद  नेताओं को हुई है  जिनको बिजली पानी से लेकर बांग्ला - गाड़ी तक सरकारी प्राप्त है। हो सकता है किसानों की ख़ुदकुशी से वोट बैंक घटने के कारण इनको तनाव हो रहा हो जिसे दूर करने हेतु इनका वेतन बढ़ाने की  जरूरत हुई हो। ये अलग बात है कि किसान आज भी अपेक्षित न्यूनतम समर्थन मूल्य की आस लगाए बैठा है जो कब पूरी हो कोई पता नहीं है।

3. युवा तो वैसे भी ऊर्जा से भरपूर होता है और भारत तो युवाओं का देश है। इसी युवा ऊर्जा को देखते हुए NATIONAL HEALTH MISSION का बजट 2.1 % कम क्र दिया गया है।

4. हमारे देश में शिक्षा गुणवत्ता और शिक्षा प्रणाली का स्तर चिंताजनक है। लेकिन , देश का चौकीदार तो अमेरिका का वीजा प्राप्त कर ही चुके हैं , तो अन्य देशवासियों के विकास पर ध्यान क्यों दिया जाये। देश के प्रधान सेवक ब्यान दे ही चुके हैं कि ' इस देश में IIT से ज्यादा ITI की जरूरत है। ' इसीलिए 'मानव संसाधन विकास मंत्रालय ( MHRD )' का बजट 0.23 % घटा दिया गया है जो की MHRD का पिछले तीन सालों का न्यूनतम बजट है।

5. हाथ में दस्ताने पहने और झाड़ू लिये साफ़ सुथरी जगहों को साफ़ करते नेताओं की तस्वीरें और होर्डिंग्स पूरा देश देख ही चुका है। लेकिन जैसे ही सही मायनों में यह अभियान गति पकड़ने लगा तो अचानक इसका पैसा घटाने की सूझी। हो सकता है अब और नरता ना बचे हों जिनकी तस्वीरें मीडिया में आणि बाकि रह गयी है। इस कारण 'स्वच्छ भारत अभियान ' का बजट भी 7 % कम कर दिया गया है।

6. माना की बच्चे इस देश का भविष्य है परन्तु , वर्तमान तो नहीं और अगस्त में तो वैसे भी बच्चे  मरते ही हैं। अगस्त आने वाला है और इन बच्चों का भविष्य सम्भवतया इन नेताओं को मालूम है। इसी को मद्देनजर  रखते हुए CHILD HEALTH FUNDING में 30 % की कटौती की गयी है।

7 देखिये जी ! कोई कुछ भी कहे , हम हैं अमीरों की सरकार , भला गरीब से हमें क्या सरोकार ? गरीब से तो कर्ज वसूलना है , उनकी सम्पत्ति जब्त करनी है , उन्हें सस्ते और अच्छे आवास देकर क्या करें ? पैसे पेड़ पर तो नहीं उगते। अगर पेड़ पर उगते भी हों तो अब तो पेड़ भी इन सारी सरकारों की नीतियों से निरंतर कम हो रहे हैं। शायद इसी उद्देश्यार्थ गरीबों के लिए सस्ते मकान की जो योजना है उसमें से भी रकम 7 % कम कर दी गयी है।

ये इतने सारे निशाने एक ही तीर से लगा दिए गए हैं वो भी सर्वदल समिल्लित COVERING FIRE  की आड़ में। हो सकता मेरी COVERING FIRE की बात गलत हो , उन सदस्यों की लड़ाई छद्म ना होकर वास्तविक भी हो सकती है ( लोकतंत्र हेतु ये हालात भी खतरनाक हैं ) , परन्तु इनके द्वारा लगाए गए ये निशाने कतई झूठ नहीं है , ये पूर्णत: वास्तविक है। इनका दंश इन नेताओं को ना झेलकर इस देश की आम जनता को झेलना पड़ता है। आज के ये ताजा और  हरे घाव कल को लोकतंत्र के लिए नासूर बन सकते हैं।
वैसे मंत्री जी ! आपकी TIMING और PLACEMENT को तो मान गए। क्या शॉट मारा है ? मतलब  मैच में दिनेश कार्तिक ने ऐसा शॉट नहीं खेला जैसा आपने उस एक पल में खेलकर मैच नेता टीम के पक्ष में कर लिया। दर्शक तो दर्शक खुद खिलाड़ी  हैरान हैं। आप तो अच्छे अच्छों को मात दे गये।

अंत में एक छोटा सा सवाल जवाब -
                                 कब तक होता रहेगा लोकतंत्र का यूँ ही अपमान
                                 कब तक लुटती रहेगी इस देश की निर्दोष आवाम
                                 सवाल सोचने पर खुद ही सामने आया जवाब
                                 भ्रष्ट ढोंगी और झूठे नेताओं में जब तक  है जान.......

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